Chitra Vichitra Biography | बाबा चित्र विचित्र का जीवन परिचय

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बाबा चित्र विचित्र Chitra Vichitra Biography ऐसा नाम है, जिसे किसी परिचय की आवश्‍यकता नहीं है। आपमें से शायद ही कोई ऐसा रसिक श्रोता होगा, जिनका इस नाम से परिचय न हो।



Katha Star (कथा स्‍टार) के प्रिय पाठको, आज हम आपको बतायेंगे बाबा चित्र विचित्र Chitra Vichitra के संत जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें, जो आप लोगों में से बहुत कम लोग ही जानते होंगे।

बाबा चित्र विचित्र का जीवन परिचय

आज के दौर में कई भजन गायक, गायन की विधा को संभाले हुये हैं, लेकिन बाबा चित्र विचित्र ऐसे भजन गायक हैं, जिनकी भजन गाने की शैली ही विचित्र है।

श्री प्रिया प्रियतम को कोई नृत्‍य से रिझाता है, कोई श्रृंगार से रिझाता है तो कोई साधना आराधना से रिझाता है,

लेकिन बाबा चित्र विचित्र Baba Chitra Vichitra श्री बिहारी बिहारिणी जू को, अपने रोमांचित कर देने वाले भजनों से रिझाते हैं

और यही कारण है कि जहॉ भी उनका भजन संध्‍या का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है वहॉ श्रोताओं का सैलाब उमड़ पड़ता है

और बाबा चित्र विचित्र के मधुर कंठ से श्री प्रिया प्रियतम लाल के भजनों को सुनकर हर कोई थिरकने पर मजबूर हो जाता है।

आपने भी इस बात को अनुभव किया होगा कि हमारे आसपास जब भी कोई धार्मिक आयोजन किया जाता है

तो डीजे साउण्‍ड में सबसे ज्‍यादा अगर किसी के भजन बजाये जाते हैं तो वे हैं बाबा चित्र विचित्र,

क्‍योंकि इनके भजनों को आज का युवा वर्ग बहुत ही ज्‍यादा पसंद कर रहा है।



तो आइये जानते हैं बाबा चित्र विचित्र के बारे में वह सब कुछ, जिसे खोजते हुये आप कथा स्‍टार पर आये हैं।

बाबा चित्र विचित्र कौन हैं | Baba Chitra Vichitra Kaun hain:-

इस पोस्ट मे क्या है देखो

सबसे पहला सवाल तो आपका भी यही होगा कि दोनों में बाब चित्र कौन हैं और बाबा विचित्र कौन हैं?

एक इंटरव्‍यू में जब ये सवाल बाबा चित्र विचित्र जी से पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि वैसे तो इस सवाल का जवाब मैं किसी को नहीं देता,

लेकिन अब आपने पूछा है तो बता रहा हॅू कि मेरे गुरुदेव सरकार ने जब हम दोनों को दीक्षा देने के उपरांत यह नाम दिया था

बाबा चित्र विचित्र कौन हैं

तो हमारी तरफ उन्‍होंने दोनों हाथ उठाकर कहा था कि आज से तुम दोनों का नाम चित्र विचित्र Chitra Vichitra है।

लेकिन गुरुदेव की इस लीला से स्‍पष्‍ट नहीं हो पाया कि हम में से कौन चित्र है और कौन विचित्र,

लेकिन बाद में प्राथमिकता के आधार पर हमने तय किया कि हममें से चित्र कौन है और विचित्र कौन है।

इन दोनों को यह नाम उनके परम पूज्‍य सद्गुरुदेव महाराज द्वारा प्रदत्‍त है।

जिस समय साधक संन्‍यास दीक्षा ग्रहण करता है तो उस समय सद्गुरुदेव उसको साधू भेष और साधू परंपरा का एक नाम देते हैं।

कथा स्‍टार के सम्‍मानीय पाठक, तो जाना आपने कि कैसे इनका नाम चित्र विचित्र पड़ा।



अब आपकी पहचान के लिए मैं आपको बता रहा हॅू कि जो बाबा तीव्र और मधुर स्‍वर में भजन गाते हैं उनका नाम है बाबा चित्र बिहारी दास और जो बाबा भक्‍तमाल कथा करते हैं उनका नाम है बाबा विचित्र बिहारी दास।

बाबा चित्र विचित्र का जन्‍म स्‍थान | Baba Chitra Vichitra Birth Place:-

बाबा चित्र बिहारी दास जी का जन्‍म गाजियाबाद जिले के मोदीनगर शहर में हुआ है।

बाबा विचित्र बिहारी दास जी का जन्‍म भी गाजियाबाद जिले के मोदीनगर शहर में हुआ है।

Chitra Vichitra ji, दोनों एक ही नगर से हैं और दोनों के परिवार पूर्ण सात्विक प्रवृत्ति के होने के कारण बचपन से ही दोनों को भक्तिमय माहौल अपने-अपने घर में मिला,

क्‍योंकि बालक को प्रथम संस्‍कार अपने परिवार से ही मिलते हैं।

बाबा चित्र विचित्र के गुरु | Baba Chitra Vichitra Ke Guru:-

बाबा चित्र विचित्र के गुरु का नाम श्री श्री १००८ परम पूज्‍य सद्गुरुदेव श्री रसिका पागल जी महाराज है। जो कि एक जाने-माने भजन गायक हैं।

बाबा चित्र विचित्र के गुरु

चित्र विचित्र जी महाराज का आध्‍यात्मिक सफर:-

सन् 1998 में मोदीनगर में श्री रसिका पागल जी महाराज का भजन संध्‍या कार्यक्रम था, जिसमें Chitra Vichitra दोनों उपस्थित थे

और रसिका पागल जी महाराज के भजन सुनकर उनके मन में कृष्‍ण भक्ति की ऐसी लगन लगी कि

उठते बैठते जागते सोते केवल और केवल श्री वृन्‍दावन धाम Vrindavan Dham जाने की इच्‍छा फलीभू‍त होने लगी।

पूज्‍य रसिका पागल Baba Rasika Pagal के भजन सुन-सुनकर श्रीधाम वृन्‍दावन के प्रति अनुराग जगा,

ब्रजवासियों के प्रति अनुराग जगा और श्री बिहारी जी के चरणों में भी अनुराग प्रस्‍फुटित होने लगा।

और वहीं से यात्रा का शुभारंभ हुआ और कालांतर में बाबा रसिका पागल से दीक्षा प्राप्‍त की

और बाबा रसिका पागल ने ही दोनों को नया नाम दिया बाबा चित्र बिहारी दास और बाबा विचित्र बिहारी दास।

चित्र विचित्र जी का परिवार | Chitra Vichitra Family :-

घर गृहस्‍थी छोड़कर संन्‍यास की ओर जाने पर Chitra Vichitra दोनों के परिवार वालों ने आपत्ति तो जरूर की थी,

लेकिन उनके घरों में सात्विक भक्तिमय माहौल होने के कारण और बिहारी की कृपा के कारण सब कुछ सुलभ होता चला गया।

क्‍योंकि जिन्‍हें ठाकुर जी अपनाते हैं, उन्‍हें प्रपंच से बचाते भी हैं।

गुरु दीक्षा प्राप्‍त करने के पूर्व बाबा चित्र विचित्र जी महाराज मित्र थे

और गुरु दीक्षा प्राप्‍त करने के उपरांत दोनों गुरुभाई Chitra Vichitra बनकर आज अपने गुरुदेव के आदेश का पालन कर रहे हैं।


Chitra Vichitra Wikipedia, Bio:-

नाम चित्र बिहारी दास,  विचित्र बिहारी दास
जन्‍म स्‍थान गाजियाबाद जिले का मोदीनगर शहर 
गुरू का नाम रसिका पागल जी महाराज
कार्य भजन संध्या एवं भक्‍तमाल कथा 
फीस 1,70,000/- से 2,00,000/- तक 
शादी नहीं
फेसबुकhttps://www.facebook.com/babachitravichitra/
Youtube channel namehttps://www.youtube.com/c/VrajBhav/featured
Contact number93198-50895,  95689- 62692
Websiteno

चित्र विचित्र जी महाराज की कहानी:-

बाबा चित्र विचित्र जी Chitra Vichitra भजन संध्‍या के अलावा श्री भक्‍तमाल कथा भी करते हैं।

बाबा चित्र विचित्र जी महाराज, स्‍वामी श्री हरिदास जी महाराज की परंपरा से संबंधित हैं।

अगर केवल संगीत की दृष्टि से देखें तो तालचन्‍द्र व बैजू बावरा जैसे महान संगीतज्ञ, स्‍वामी श्री हरिदास महाराज के शिष्‍य हुये।

चित्र विचित्र जी महाराज की कहानी:

इसके साथ-साथ उनके विरक्‍त जीवन में साधु परंपरा भी चली।

इस प्रकार बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra, स्‍वामी श्री हरिदास की विरक्‍त परंपरा से साधु हैं।

इस परंपरा में ठाकुर जी को नाना प्रकार के गान, राग-भोग इत्‍यादि कला से ही रिझाया जाता है।

भजन गायन के क्षेत्र में कई भजन गायक हुये, जो अपनी-अपनी शैली में भजनों की प्रस्‍तुति देते हैं

और सबके अपने-अपने श्रोता भी है, जैसे श्री विनोद अग्रवाल जी और पूनम दीदी।  

लेकिन बाबा चित्र विचित्र Chitra Vichitra की एक अलग ही शैली है, जो सामने बैठे श्रोताओं को झकझोर देती है और साज बाज पर नाचने को मजबूर कर देती है।

बाबा चित्र विचित्र जी महाराज कहते हैं कि उनमें ऐसी कोई विशेषता नहीं है, जो कि श्रोताओं को बांध दे,

यह तो उनके गुरुदेव सरकार और बिहारी जी की ही कृपा का फल है कि थोड़ा सा सहारा उनको भी मिल गया।

अनुरागयुक्‍त तरीके से यदि बिहारी जी या श्री जी का नाम लिया जाये तो सुनने वाला आकर्षित और प्रभावित होगा ही होगा।

संगीत है शक्ति ईश्‍वर की, हर कण में बसे हैं राम

रागी जो सुनाये रागिनी, रोगी को मिले आराम।

चित्र विचित्र के वृन्‍दावन के प्रति भाव:

बाबा चित्र बिहारी दास जी Chitra Vichitra Vrindavan wale कहते हैं कि श्री धाम वृन्‍दावन में तो ठाकुर जी रोज किसी न किसी भक्‍त के साथ लीला कर रहे हैं।

यह बताने का विषय नहीं है कि मेरे साथ क्‍या-क्‍या लीलायें श्री ठाकुर जी ने की हैं।

इसलिए हम इसे मानते ही नहीं कि ये पंचकोषीय वृन्‍दावन धरती पर है, यह तो साक्षात श्री ठाकुरजी का हृदय कमल है,

जिसमें श्रीजी निवास करती हैं और यहॉ के संतो की जीवनशैली देखकर, उनकी रहनी देखकर मन में दृढ़ विश्‍वास होता है

कि उनकी देखरेख उनकी व्‍यवस्‍था कहीं न कहीं युगल सरकार जी कर रहे हैं

और यही कारण है कि यहॉ एक बार आने के बाद जीव यहीं का होकर रह जाता है।

चाहे वो पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति से कितना भी प्रभावित क्‍यों न हो,

Chitra Vichitra wiki

पर एक बार वृन्‍दावन धाम में आकर दर्शन करके यहॉ के संतों का प्रभाव देखकर, उनकी भजन साधना को देखकर बस यहीं का ही होकर रह जाता है।

यही कारण है कि विश्‍व का हर आदमी यही चाहता है कि हमें वृन्‍दावन का वास मिल जाये।

क्‍योंकि यहॉ हर कोई किसी न किसी रूप में श्री युगल सरकार की कृपा का अनुभव करता है।

श्रीधाम वृन्‍दावन साधारण लोक नहीं है, यह प्रिया प्रियतम का दिव्‍य रस देश है।



जो एक बार इस नदी के किनारे बैठेगा, उसकी प्‍यास तो बुझेगी ही और साथ ही साथ शीतलता का अनुभव भी होगा, ऐसा कल्‍पतरु है श्री धाम वृन्‍दावन।

बाबा चित्र विचित्र का भक्‍तों के लिए संदेश:-

श्रीधाम वृन्‍दावन में आने वाले भक्‍तों से बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra अपना अनुभव साझा करते हुये कहते हैं कि बृजवासियों में पूर्ण निष्‍ठा रखो, क्‍योंकि ऐसा कहा जाता है‍ कि-

ग्रहस्‍थी के गुरु संन्‍यासी, संन्‍यासी के गुरु अविनाशी,

और अविनाशी के गुरु ये ब्रजवासी।

इसलिए इन्‍हीं के बीच में लाला व लाली खेलें।

इनमें भाव जमाओगे, इनमें अनुराग रखोगे, तो प्रिया प्रियतम के सुख को प्राप्‍त कर जाओगे।

ब्रज के प्रत्‍येक जीव जंतु से अनुराग रखो, प्रेम रखो, सोई वृन्‍दावन के रस को प्राप्‍त कर पाओगे।

आप कितना ही व्‍यस्‍त रहो, लेकिन कुछ पल जीवन में ऐसे जरूर होना चाहिए,

जहॉ केवल आप हों और आपके प्‍यारे ठाकुर जी हों। क्‍योंकि हम जैसे दीनों की सुनने वाले तो केवल बांके बिहारी ही हैं।

संसार कुछ समय के लिए मदद तो कर सकता है, लेकिन मदद करने का एक कर्जा हम पर चढ़ जाता है

जबकि बां‍के बिहारी जी तो अकारण कृपा करते हैं। संसार जगत के सभी रिश्‍तों के साथ सुंदर व्‍यवहार करते हुये केवल बिहारी जी से ही प्रेम करो।

मैंने नहीं कहा है, संसार कहता सारा।

रखता है लाज सबकी, सांवरिया सेठ प्‍यारा।।

वृन्‍दावन धाम आने के बाद अनुभव हुआ कि-

सारी दुनिया में ऐसा कोई फूल खिला नहीं,

प्‍यार सबसे से इन्‍हें, किसी से कोई गिला नहीं।

सारा जगत घूमकर देख लिया हमने भी,

पर हमें तो बांके बिहारी जैसा यार मिला नहीं।।

बाबा चित्र विचित्र के बेस्‍ट भजन Chitra Vichitra Best Bhajan :-

  • मेरी विनती यही है राधा रानी,  कृपा बरसाये रखना
  • काली कमली वाला मेरा यार है।
  • सांवरे को दिल में बसा कर तो देखो।
  • मुझे रास आ गया है, तेरे दर पे सर झुकाना।
  • कृपा की न होती जो आदत तुम्‍हारी।
  • तेरी गलियों का हॅू आशिक, तू इक नगीना है।
  • तेरे चरणों में हो जीवन की शाम।
  • सांसों की माला पे सिमरू मैं पी का नाम।
  • सांवरिया ले चल पर्ली पार।
  • मेरा दिल तो दीवाना हो गया, मुरलीवाले तेरा।
  • मैं तो तुम संग होली खेलूंगी, मैं तो तुम संग।

Chitra Vichitra Contact Number :-

बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra से भजन संध्‍या या भक्‍तमाल कथा   कराने के लिए संपर्क सूत्र- 93198-50895,  95689- 62692

Chitra Vichitra Program Fees :-




बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra की एक भजन संध्‍या की फीस एक लाख सत्‍तर हजार रुपये (1,70,000/-)  से दो लाख रुपये (2,00,000/-) के बीच में होती है।

जो भगवान को गाकर रिझाना चाहते हैं वे चित्र विचित्र जी के यह विचार जरूर जानें:-

उगते हुये कलाकारों या संगीत की अन्‍य विधाओं में भविष्‍य बनाने वाले विद्यार्थियों से बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra कहते हैं कि

आप भजन गायकी में जरूरी नहीं कि अपनी कला दिखायें, भजन गायकी में जरूरी है भाव का होना।

उसमें राग जरूरी नहीं है, उसमें भाव जरूरी है।

यदि आपकी रागों, रागनियों या शास्‍त्रीय संगीत पर पकड़ है तो बहुत अच्‍छी बात है,

लेकिन यदि शास्‍त्रीय संगीत की कला आपके अंदर नहीं है तब भी आप भजन गायन कर सकते हैं1

क्‍योंकि इसके लिए राग की नहीं भाव की जरूरत होती है।

Chitra Vichitra wiki

आप भले ही शास्‍त्रीय संगीत में पारंगत होकर भजन प्रस्‍तुत कर रहे हों, पर यदि उसमें भाव नहीं है

तो वह केवल एक मनोरंजन का ही साधन मात्र है पर यदि उसमें आपके मन का भाव मिला हुआ है

तब ही वह सही अर्थों में भजन कहा जायेगा।

सब भजन गायकों की अपनी अलग शैली होती है, इसलिए आप किसी की शैली की नकल न करें।

जो आपके अंदर है, आप उसे ही अपनी शैली बनायें और स्‍वाभाविक रूप से उसे बाहर आने दें।

हर कलाकार की अपनी खुद की ही शैली होना चाहिए।

हमारे गुरुदेव सरकार पूज्‍य श्री रसिका पागल जी महाराज की अपनी अलग शैली है

और उन्‍हीं का कृपा प्रसाद हमें भी मिल गया है, जिससे हमारी अपनी एक शैली बन गयी।

गायक हमेशा गले से गाता है और जो भक्‍त होता है वह हमेशा अपने हृदय से गाता है। इसलिए नये कलाकार गले से ना गाकर हृदय से गाएं।

श्रोताओं के प्रति चित्र विचित्र जी के भाव:-

बाबा चित्र विचित्र जी महाराज Chitra Vichitra कहते हैं कि जब नये कलाकार किसी सभा में भजन भाव के लिए जायें

तो सामने बैठे श्रोताओं को केवल साधारण श्रोता ही न समझें, बल्कि आपके मन में यह भाव आना चाहिए कि

सामने केवल श्रोता ही नहीं बैठे हैं, बल्कि प्रत्‍येक श्रोता के मन में श्री युगल सरकार बैठकर भजन सुन रहे हैं।

तभी आपके भजनों में भाव आयेगा और एक अलौकिक देवीय शक्ति का जन्‍म होता है,

जिसे सुनकर श्रोताओं के मन के तार भी झंकृत होने लगते हैं और वे आकर्षित होते हैं, प्रभावित होते हैं और झूमने लगते हैं।



प्रश्‍न:- क्‍या बाबा चित्र विचित्र की शादी हुयी है?

उत्‍तर:- नहीं।

प्रश्‍न:- क्‍या बाबा चित्र विचित्र ग्रहस्‍थ जीवन जीते हैं?

उत्‍तर:- नहीं,  बाबा चित्र विचित्र विरक्‍त संत हैं।

प्रश्‍न:- बाबा चित्र विचित्र की उम्र क्‍या है?

उत्‍तर:- बाबा चित्र बिहारी दास की अनुमानित आयु 33  वर्ष है और बाबा विचित्र बिहारी दास की अनुमानित आयु 35 वर्ष है। 

प्रश्‍न:- बाबा चित्र विचित्र का पता क्‍या है?

उत्‍तर:- बाबा चित्र विचित्र  जी के आश्रम का पता भक्ति वेदांत स्‍वामी मार्ग,  वृन्‍दावन उत्‍तर प्रदेश।



चलते-चलते:-

यह जानकारी आपको कैसी लगी, हमें कॉमेंट करके बताना न भूलें।  हम आपके कॉमेंट का इंतजार करते हैं।

मुझे आशा है कि आपको Baba Chitra Vichitra की लगभग सभी जानकारियॉ मिल चुकी होगी। फिर भी अगर आपके पास कोई जानकारी है तो हमें कॉमेंट करके जरूर बतायें।

Chitra Vichitra Biography लेख पढ़ने के लिए धन्‍यवाद।


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