इस्‍कॉन में दीक्षा कैसे लें

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अगर आप इस्‍कॉन के बारे में जानने के लिये उत्‍सुक हैतो इस लेख में बने रहे क्‍योकिं इस लेख में हम आपको Iskcon से जुडी सभी जान‍कारिया देगे जैसे कि आप Iskcon से कैसे जुड सकते हो, इस्‍कॉन में दीक्षा कैसे ली जाती है और दीक्षा लेने के लिए क्‍या-क्‍या करना होता है, एग्‍जाम में क्‍या-क्‍या आता है, हम आपको विस्‍तार से बतायेंगे ।



इस लेख को आपकी सुविधा के लिये मैने तीन चरणों में बाटा है जिसमें कि पहले चरण में आपको दीक्षा लेते समय क्‍या शिक्षा दी जाती है उसके बारें में बतायेंगे उसके बाद दूसरे चरण में परीक्षा कैसी होती और तीसरे चरण में दीक्षा कैसे दी जाती है।

इस्‍कॉन सन्‍यासी बनने की प्रक्रिया | Iskcon joining Rules in Hindi

इस्‍कॉन एक आध्‍यात्‍मिक शिक्षा का केन्‍द्र है । महाविद्यालयों एवं विश्‍वविद्यालयों में शिक्षा की जो पद्धति होती है, ठीक उसी पद्धति से इस्‍कॉन में भी शिक्षा दी जाती है । पहला Step होता है शिक्षा, जिसके अंतर्गत हमें पहले सिखाया जाता है अर्थात् पहले हमें आध्‍यात्मिक शिक्षा दी जाती है ।

दूसरा Step होता है परीक्षा, जिसमें हमारा Examination किया जाता है अर्थात् हमें परीक्षा पास करनी होती है । कई लोगों के साथ ऐसा भी होता है कि वे परीक्षा में फेल हो जाते हैं,
पर आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है, क्‍योंकि इस्‍कॉन में दीक्षा लेने की प्रक्रिया इतनी कठिन भी नहीं है । अगर आप नियमित रूप से Class Attend करेंगे और ठीक से पढ़ाई करेंगे तो आप आसानी से परीक्षा पास कर लेंगे ।



आपको घबराने की जरूरत इसलिए भी नहीं है, क्‍योंकि मैं दावे के साथ ये कह सकता हॅू कि आप परीक्षा को एक ही बार में और वह भी बहुत आसानी से हंसते-हंसते पास कर लेंगे ।
मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्‍योंकि आपके अंदर इस्‍कॉन से जुड़ने की, अपने सनातन धर्म को जानने की,

अपने आप को जानने की एवं अपनी आध्‍यात्‍मिक यात्रा शुरू करने की चाह है तभी तो आप Katha Star पर आकर इस्‍कॉन में दीक्षा लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं और बड़ी ही रोचकता के साथ इस लेख को पढ़ रहे हैं ।

यह इस बात का प्रमाण है कि आप पूरी तरह से इस्‍कॉन से जुड़ने के लिए तैयार हैं और आपको इस्‍कॉन से जुड़ने से अब कोई रोक नहीं सकता, क्‍योंकि जब हम किसी लक्ष्‍य को पाने के लिए अपने मन के अंतिम स्‍तर से प्रयासरत रहते हैं तो ये प्रकृति भी हमारी हर संभव मदद करने लगती है और ईश्‍वर भी उन्‍हीं की मदद करते हैं तो अपनी मदद स्‍वयं करते हैं

इसलिए मेरा दृढ़ विश्‍वास है कि आप इस्‍कॉन की परीक्षा में निश्चित रूप से पहली बार में ही पास हो जायेंगे



आगे के लेख में, मैं आपको विस्‍तार से बताउंगा कि परीक्षा का Slybus क्‍या है, किस-किस Topic से Question पूछे जाते हैं वगैरह-वगैरह । तीसरा Step होता है दीक्षा, परीक्षा पास करने के बाद हमें दीक्षा दी जाती है । तब जाकर दीक्षा का पूरा Process Complete होता है ।

आइये अब मैं आपको Step By Step शुरू से बताता हूं कि दीक्षा लेने के लिए आपको क्‍या-क्‍या करना पड़ेगा :-

इस्‍कॉन में दीक्षा कैसे मिलती है ? Iskcon joining process

Iskcon me Diksha Kaise le

सबसे पहले आप गूगल पर सर्च कीजिए कि आपके घर के सबसे नदजीक इस्‍कॉन टेम्‍पल कहॉ पर है । आप जहॉ रहते हैं वहॉ नदजीक में कोई न कोई इस्‍कॉन टेम्‍पल जरूर होगा,

क्‍योंकि दुनिया में शायद ही ऐसी कोई जगह होगी जहॉ इस्‍कॉन का टेम्‍पल न हो इसलिए आपको आसानी से ही अपने घर के नदजीक कोई इस्‍कॉन टेम्‍पल मिल जायेगा यदि कोई इस्‍कॉन टेम्‍पल नहीं होगा तो इस्‍कॉन का प्रीचिंग सेंटर तो जरूर ही होगा ।

तो सबसे पहले आपको वहॉ जाकर उनसे संपर्क करना है और आपको उन्‍हें यह बताना होगा कि आप इस्‍कॉन में दीक्षा लेना चाहते हैं । इसके बाद वो लोग आपको गाइड करेंगे और पूरा प्रोसेस समझा देंगे कि आपको क्‍या-क्‍या स्‍टेप फोलो करना है और क्‍या-क्‍या तैयारी करना है ।

लेकिन चूंकि इस्‍कॉन में दीक्षा लेने का प्रोसेस क्‍या है, यह जानने के लिए आप कथा स्‍टार बेव साइट पर आये हैं तो यह मेरा कर्तव्‍य है कि आपको घर बैठे ही मैं अधिक से अधिक जानकारी दे सकूं ताकि आपको दीक्षा लेने में कोई समस्‍या न हो ।

मेरी टीम ने स्‍वयं इस्‍कॉन टेम्‍पल जाकर दीक्षा का सारा प्रोसेस पता किया है और वहॉ के कई ऐसे डेवोटी जो वहॉ रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, उनसे भी बात की है और उनका अनुभव जानने का प्रयास किया है तो वहॉ से जो जानकारी मुझे मिली है और जो मैंने जाना है वह सारा का सारा अनुभव मैं आपको इस लेख में बता रहा हूं ।

कहते हैं ना कि कोई भी काम शुरू करने से पहले हमें उस काम के बारे में जितना संभव हो सके सेल्‍फ स्‍टडी कर लेना चाहिए ताकि आगे चलकर हमें कोई समस्‍या का सामना न करना पड़े और हम आसानी से अपने लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर सकें ।

तो प्रिय पाठको, आप यह समझिये कि इस लेख में आपकी सेल्‍फ स्‍टडी ही हो रही है । अगर आप अपना होम वर्क पूरा कम्‍प्‍लीट करके जायेंगे तो निश्चित ही आपको किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा ।

इस्‍कॉन में दीक्षा तक पहुंचने के लिए पहले दो स्‍टेज को पार करना होता है, मैं आपको पहले ही बता चुका हूं कि दीक्षा तीन स्‍टेज का प्रोसेस होता है । उपर जो तीन स्‍टेप मैंने बताये हैं वह सामान्‍य बोलचाल की भाषा में बताये हैं ताकि आपको समझ में आ सके कि प्रोसेस क्‍या है ।

अब मैं उन्‍हीं तीन स्‍टेप को नीचे इस्‍कॉन टेम्‍पल की भाषा में बता रहा हूं :-

पहला स्‍टेप – आकांक्षी




आकांक्षी स्‍टेप में प्रवेश करने से पहले आपको तीन चीजें खरीदना होगा जो इस्‍कॉन मंदिर में ही आपको मिल जायेगी । हर इस्‍कॉन मंदिर में एक स्‍टॉल होता है जिसमें जप माला, जप बैग, साक्षी माला, तुलसी कंठी माला, भगवत गीता और भी कई आध्‍यात्मिक किताबें एवं सामग्री उपलब्‍ध रहती हैं ।

तो स्‍टॉल में से आपको जप माला, जप बैग एवं साक्षी माला खरीद लेना है । जप माला:- जप माला में 108 Beets (मनका) होते हैं जिस पर आपको हरे कृष्‍णा महामंत्र का जप करना होता है ।Iskcon se kaise jude


जप माला दो प्रकार की होती है :- एक दीक्षा के पहले की जप माला और दूसरी दीक्षा के बाद की जप माला । दीक्षा के पहले वाली जप माला बेल की लकड़़ी से बनी होती है ।
दीक्षा के बाद वाली जप माला तुलसी की बनी होता है , जो दीक्षा के समय गुरूदेव द्वारा प्रदान की जाती है ।

जप बैग:- जप बैग, जप माला को रखने के लिए होता है । और तीसरा साक्षी माला:- साक्षी माला, जप की गिनती करने के लिए होती है कि आपने आप आज कितने राउंड जप किया है ।
नये विद्यार्थी को कम से कम एक साक्षी माला जप करने का नियम शुरूआत के लिए बताया जाता है ।Iskcon se kaise jude

Iskon japa mala rules hindi | माला करने के नियम

एक साक्षी माला जप करने का मतलब :- साक्षी माला में एक साथ 16 मनका (गुरिया) होते हैं और कुछ दूरी पर अलग से 4 मनका (गुरिया) होते हैं ।

हरे कृष्‍णा महामंत्र की 01 जप माला पूरी हो जाने पर साक्षी माला के 16 मनकों में से 01 मनके को आगे सरका दिया जाता है, महामंत्र की दूसरी जप माला पूरी हो जाने पर साक्षी माला के बचे 15 मनकों में से दूसरे मनके को आगे सरका दिया जाता है इसी प्रकार 16 जप माला Complete हो जाने पर साक्षी माला के 16 मनकों को आगे सरका दिया जाता है यह जप याद रखने की एक आसान विधि होती है जिससे हमें पता चल सके कि आज हमने कितना महामंत्र जप किया है ।

इसी प्रकार साक्षी माला के 16 मनकों को आगे सरका देने के बाद साक्षी माला में जो अलग से 04 मनके होते हैं, उनमें से 01 मनके को आगे सरकाकर 16 मनकों को वापस पीछे सरका दिया जाता है इस प्रकार 16*4=64 महामंत्र का जप किया जाता है ।

इस प्रकार नये विद्यार्थी को कम से कम एक साक्षी माला जप करने का नियम शुरूआत के लिए बताया जाता है अर्थात् 16 राउंड जप माला ।

आकांक्षी के बारे में जानकारी:-

आकांक्षी का अर्थ होता है इच्‍छुक, जिज्ञासु, पाने की इच्‍छा रखने वाला । अगर आप शाकाहारी हैं तो बहुत अच्‍छी बात है, परंतु यदि आप मांसाहारी हैं तब भी कोई दिक्‍कत वाली बात नहीं है । आप पहले स्‍टेप – आकांक्षी के लिए पूरी तरह से फिट हैं आपको इस्‍कॉन मंदिर के अंदर हर स्थिति में स्‍वीकार किया जायेगा ।

आकांक्षी में प्रवेश करने पर आपको एक नियम का पालन करना होगा, और वह नियम है हरे कृष्‍णा महामंत्र की कम से कम 04 जप माला, मतलब 108*4= 432 times हरे कृष्‍णा महामंत्र का जप । इतना करने के बाद ही आप आकांक्षी लेने के लिए तैयार माने जायेंगे ।

Katha Star के प्रिय पाठको, इसका यह अर्थ बिल्‍कुल भी नहीं है कि आपको केवल 04 माला जप ही करना है यह केवल शुरुआत के लिए बताया गया है अगर आपका मन लग रहा है और आपको अच्‍छा लग रहा है तो आप 04 माला के स्‍थान पर 06, 07, 08, 09, 10 etc. माला जप कर सकते हैं ।



आप जितना अधिक माला जप करेंगे आपको तीसरे स्‍टेप – दीक्षा के समय उतनी ही आसानी होगी । इसलिए आप शुरुआत से ही Practice करना शुरु कर दीजिए ताकि आपके शरीर को, आपके मन को और आपके मस्तिष्‍क को जप करने की आदत हो जाये ।

यहॉ मैं आपको यह भी साफ – साफ बता देना चाहता हूं कि तीसरे स्‍टेप – दीक्षा में प्रवेश करने के पहले तक आपको 16 राउंड जप माला करना आना चाहिए अर्थात् आपको दीक्षा तभी दी जायेगी जब आप 16 राउंड जप माला करने लग जायेंगे । 16 राउंड जप माला का मतलब होता है 01 राउंड साक्षी माला ।

आकांक्षी कब करवाया जाता है :-

यह मंदिर की व्‍यवस्‍था पर निर्भर करता है कि मंदिर प्रशासन कब इस कार्यक्रम का आयोजन करता है । जैसे व्‍यास पूजा पर, किसी विशेष तिथी पर या किसी विशेष त्‍यौहार या पर्व पर ।
आकांक्षी होने के लिए आपको कोई परीक्षा नहीं देनी पड़ती है बस श्रील प्रभुपाद जी के चरणों में पुष्‍प अर्पित करना होता है और उसके बाद आपका पहला स्‍टेप – आकांक्षी पूर्ण हो जाता है।
आकांक्षी पूर्ण होने का मतलब है कि आप आने वाले समय में यानी कि भविष्‍य में इस्‍कॉन में दीक्षा लेना चाहते हैं । आपने इस्‍कॉन में दीक्षा लेने के लिए अपनी इच्‍छा जाहिर की है या अपनी आकांक्षा प्रकट की है ।

स्‍टेप दूसरा – चरण आश्रय  

चरण आश्रय लेने से पहले आपको तुलसी कंठी माला धारण करनी होती है । इसे कंठ (गले) में धारण किया जाता है इसलिए इसे सरल शब्‍दों में साधारण बोलचाल की भाषा में कंठी माला कहा जाता है ।

कंठी माला के नियम | Mala jap vidhi

कंठी माला धारण करने के बहुत से नियम होते हैं ::::::————

चरण आश्रय लेने से पहले कुछ साधारण से नियमों का पालन आपको करना पड़ेगा जो इस प्रकार हैं:-

  • 1. आपको मांसाहारी भोजन नहीं करना है ।
    2. नशा नहीं करना है ।
    3. अच्‍छे और सात्विक वातावरण में रहना है ।
    4. किसी की निंदा नहीं करना है ।
    5. जितना संभव हो सके झूठ बोलने से बचें ।
    6. गलत या गंदे काम नहीं करना है ।
    7. सरल एवं सात्‍विक जीवन जीना है ।
    8. एकादशी का व्रत करना है ।
    9. भगवान को भोग लगाकर ही प्रसाद (भोजन) गृहण करना है ।
    10. 04 माला जप को बढ़ाकर 16 माला जप करना ही होगा ।




इस्‍कॉन मंदिर के अंदर एक कोर्स होता है जो तीसरे स्‍टेप – हरिनाम दीक्षा के पहले Complete कराया जाता है मतलब कि यह Course दूसरे स्‍टेप – चरण आश्रय का ही एक भाग होता है । जिसका नाम है IDC (Iskcon Disciple Course)

Iskcon disciple course exam 

यह कोर्स इस्‍कॉन में दीक्षा लेने के लिए अनिवार्य होता है । इस्‍कॉन में दीक्षा लेने वाले हर आकांक्षी को यह कोर्स करना होता है, जो कि बहुत ही आसान होता है।इसके लिए आपको एक Form Fillup करना होता है और नियमित रूप से कक्षा जाना होता है ।

इस कोर्स के अंदर बहुत से Topic होते हैं, कुछ महत्‍वपूर्ण और आवश्‍यक Topic इस प्रकार हैं :-

  • आप दीक्षा क्‍यों ले रहे हो, सदगुरु का हमारे जीवन में क्‍या महत्‍व है,
  • गुरु और शिष्‍य का क्‍या संबंध होता है,
  • शिष्‍य को गुरु का आदेश क्‍यों मानना चाहिए,
  • शिष्‍य के क्‍या- क्‍या कर्तव्‍य होते हैं वगैरह- वगैरह के बारे में विस्‍तार से सिखाया जाता है ।

आप जिस इस्‍कॉन मंदिर में जा रहे हैं यह कोर्स वहीं कराया जायेगा या फिर यह कोर्स कराने के लिए आपको वृन्‍दावन या मायापुर भेजा जायेगा । इसके साथ-साथ आपको सुबह मंगला आरती, शाम को संध्‍या आरती, तुलसी आरती, 16 माला जप प्रतिदिन, एकादशी के दिन 25 माला जप, एकादशी व्रत करना होगा ।

बाजार में दिखायी देने वाले तेल, मिर्च, मसाला के चटपटे एवं खट्टे-मीठे पकवान (जंक फूड) नहीं खाना है ।आप बाजार से ताजा मिठाई, फल, जूस, शेक वगैरह ले सकते हैं ।

मैंने आपको उपर नियम बताया है कि भगवान को भोग लगाने के बाद ही प्रसाद गृहण करना है, पर यदि आपके साथ कभी ऐसी स्‍थिति बनती है कि आपके पास कोई खाने का सामान (शाकाहारी भोजन) है और आप उसे खाने से पहले भगवान को भोग लगाना चाहते हैं, पर आप ऐसी जगह पर हैं जहॉ न तो आपके सामने भगवान की प्रतिमा है और ना ही तुलसी पत्र, तब आप कैसे भोग लगायेंगे ।

यदि आपको इस्‍कॉन में दीक्षा लेना है तो उपर बताये हुये नियमों का पालन करना ही होगा, इस नियम का पालन करने के लिए आसान उपाय यह है कि आप अपने कंठ में धारण की हुयी तुलसी माला से उस खाने (शाकाहारी भोजन) को स्‍पर्श कराइये और मन ही मन भगवान को याद करते हुये उन्‍हें भोग लगा दीजिए उसके बाद वह प्रसाद आप गृहण कीजिए, इस प्रकार आपके नियम का पालन हो जायेगा ।

पर यदि आप दुनिया के किसी ऐसे देश में हैं, जहॉ शाकाहारी भोजन मिलना असंभव है तो ऐसी विषम परि‍स्‍थि‍ति में आप मांसाहारी भोजन का सहारा ले सकते हैं पर इसका मतलब यह बिल्‍कुल भी नहीं है कि आप शाकाहारी भोजन पाने के लिए प्रयास ही छोड़ दें, यदि आप प्रयास करेंगे और मन में यह निश्‍चय कर लेंगे कि चाहे जो हो जाये मैं मांसाहारी भोजन नहीं करूंगा तो भगवान किसी न किसी रूप में स्‍वयं आकर आपकी मदद करेंगे ।

तीसरे स्‍टेप – हरिनाम दीक्षा

प्रवेश करने से पहले आपका Exam होता है और चार नियमों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है, जो इस प्रकार हैं:-

  • 1. मांसाहारी भोजन नहीं करना है ।
    2. किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना है (जैसे चाय, कॉफी, शराब, सिगरेट, गांजा, गुटखा, पान, तम्‍बाकू आदि)
    3. जुआ नहीं खेलना है (ऐसा कोई भी खेल जिसकी लत लग जाती है)
    4. कोई अवैध संबंध नहीं बनाना है ।

जैसे-जैसे आप Step by Step आगे बढ़ते जायेंगे आपको अपने आपको संयमित करना होगा, क्‍योंकि यहॉ तक पहुंचने के बाद अगर आपने किसी नियम को तोड़ा तो आपको इस्‍कॉन से बाहर भी किया जा सकता है, जो आप कभी नहीं चाहेंगे इसलिए इन बातों का विशेष ध्‍यान रखना पड़ेगा ।

इस्‍कॉन परीक्षा|Iskcon Exam

इसके लिए ”नाम हट्ट” नाम की एक किताब आती है जो ऑनलाइन मिलती है, जहॉ आपका इस्‍कॉन मंदिर है वहॉ के बुक स्‍टाल में मिल जायेगी और मायापुर वृन्‍दावन में तो जरूर ही मिल जायेगी । यह किताब हर भाषा में उपलब्‍ध है, तो इसका अध्‍ययन करने में आपको कोई भी समस्‍या नहीं होगी ।



इस किताब के एक चरण में 20 प्रश्‍न हैं जो खास तौर पर दीक्षा के लिए बनाये गये हैं, जो कि लिखित परीक्षा में लिखने के लिए आते हैं इसलिए इन प्रश्‍नों को आप अच्‍छी तरह से याद कर लेना । इन प्रश्‍नों के उत्‍तर आपको दीर्घउत्‍तरीय रूप में लिखने पड़ेंगे ।

परीक्षा दो चरणों में होती है, पहला चरण आपके लोकल इस्‍कॉन टेम्‍पल में होगा, अगर आप वह परीक्षा पास कर लेते हैं तब दूसरे चरण की परीक्षा के लिए आपको इस्‍कॉन की मेन ब्रांच में भेजा जायेगा । भारत के अंदर हर महानगर में इस्‍कॉन की एक ब्रांच हैं, तो आपके घर के नदजीक जो महानगर होगा, आपको वहॉ की ब्रांच में दूसरे चरण की परीक्षा के लिए बुलाया जायेगा । जैसे कि मायापुर, वृन्‍दावन, मुंबई आदि ।

सभी आरती आपको याद होना चाहिए, जैसे मंगल आरती, संध्‍या आरती, तुलसी आरती, गुरु वंदना, श्री गुरु चरण वगैरह । यह सब आपको जो इनकी तर्ज बनायी गयी है, उस तर्ज पर गाते हुये याद होना चाहिए । आपको वहॉ गाकर सुनाना होगा ।

”नाम हट्ट” किताब में एक Topic होता है दसविद् नामअपराध

जिसमें आपको क्रमानुसार कई बिन्‍दु दिये गये होंगे, जो आपको उसी क्रम में याद करना होगा । यहॉ आप इस बात का विशेष ध्‍यान दीजिए कि वे बिन्‍दु जिस क्रम में दिये गये हैं आपको उसी क्रम में याद करना होगा, क्रम नहीं बिगड़ना चाहिए ।

क्‍योंकि दूसरे चरण की परीक्षा में आपको कोई भी बिन्‍दु के बारे में पूछा जायेगा जैसे कि 04 Number में क्‍या है, 07 Number में क्‍या है वगैरह – वगैरह । तो आपको सारे बिन्‍दु क्रम से ही याद करना पड़ेंगे ।
हमारी बेव साइट Katha Star पर दीक्षा के लिए इतना सारा पाठ्यक्रम पढ़ने के बाद आप सोच रहे होंगे कि इन सबको याद करने का क्‍या मतलब है, इससे हमें क्‍या फायदा होगा, यह सब बेकार है, दीक्षा लेने के लिए इन सब चीजों को पढ़ने की क्‍या जरूरत है, जप माला करने से क्‍या होगा, वगैरह- वगैरह ।

यदि मैं आपको अपना निजी अनुभव बताउं तो यह बहुत ही जरूरी है, क्‍योंकि इससे आपका भक्ति जीवन शुरू होगा, आपके जीवन की आध्‍यात्‍मिक यात्रा शुरू होगी, आपको भगवान से प्रेम होने लगेगा, क्‍योंकि इसी के लिए हम इस धरती पर मृत्‍युलोक में आये हैं और मानव शरीर धारण किया है

और जब हमारा शरीर छूटेगा मतलब जब हमारी मृत्‍यु होगी तो यही सब भक्ति ही हमारे साथ जायेगी ना कि हमारा पैसा, घर, गाड़ी, इज्‍जत, पत्‍नी, पुत्र, सगे-संबंधी । ये सब तो यहीं छूट जायेगा ।

दूसरे चरण की लिखित परीक्षा के अलावा आपका साक्षात्‍कार भी होगा । साक्षात्‍कार में वहॉ के गुरूजन आपसे कुछ भी पूछ सकते हैं, इसके बारे में मैं आपको कुछ नहीं बता पाउंगा,
इसके लिए आपको नियमित क्‍लास करनी होगी, कोर्स पूरा करना होगा, जो याद करने के लिए कहा जायेगा वो याद करना होगा, क्‍योंकि साक्षात्‍कार में पूछे जाने वाले प्रश्‍न इसी के बीच में से पूछे जायेंगे ।

इन नियमों का पालन करने पर आपका दूसरा स्‍टेप चरण आश्रय Complete हो जायेगा ।
चरणाश्रय के तुरंत बाद हरिनाम दीक्षा नहीं होता है । चरणाश्रय लेने के बाद कम से कम 06 माह आपको रुकना पड़ेगा उसके बाद ही आपको हरिनाम दीक्षा दी जायेगी ।

Iskcon Harinam Diksha

हरिनाम दीक्षा में आपके गुरु महाराज आपको अपने हाथों से एक नयी तुलसी माला देते हैं जो आपको अपने गले में धारण करनी होती है । इसके अलावा आपको नयी जप माला भी आपके गुरु महाराज द्वारा प्रदान की जायेगी । जिससे आपको हरे कृष्‍ण महामंत्र का जप करना होता है । दीक्षा के पहले वाली कंठी माला को गले से उतार दिया जाता है ।

दीक्षा के समय गुरु महाराज जी द्वारा आपको मंत्र दिया जाता है तथा आपसे यज्ञ व हवन कराया जायेगा तथा गुरु महाराज द्वारा भगवान से यह प्रार्थना की जाती है कि ‘हे प्रभु इस बच्‍चे को आप अपने दास या दासी के रूप में स्‍वीकार कीजिए, यह आज से आपका नित्‍य दास या नित्‍य दासी है ।’

दीक्षा देने के बाद आपका नाम बदला जाता है अर्थात् आपको एक नया नाम दिया जाता है । नये नाम के पीछे ‘दास’ और ‘दासी’ शब्‍द भी जोड़ा जाता है । पुरुष के लिए ‘दास’ और महिला के लिए ‘दासी’ शब्‍द का प्रयोग किया जाता है ।

इस्‍कॉन के अंदर सभी पुरुषों को ‘प्रभुजी’ शब्‍द से संबोधित किया जाता है तथा महिलाओं को ‘माताजी’ शब्‍द से संबोधित किया जाता है ।
इस्‍कॉन के अंदर सभी भक्‍त एक-दूसरे का आदर व सम्‍मान करें इसलिए इन शब्‍दों का प्रयोग किया जाता है ।

दीक्षा मिलने के बाद शिष्‍य का यह परम कर्तव्‍य होता है कि वह अपने गुरुजी के हर आदेश का, उनकी हर आज्ञा का पालन करे, अपने गुरुजी की सेवा करे और कोई भी ऐसा अनुचित कार्य न करे जिससे उसके गुरुजी की आत्‍मा को कष्‍ट पहुंचे । दीक्षा के बाद जो अगली प्रक्रिया होती है उसका नाम है भिक्षा ।

दीक्षा मिलने के बाद आपको अपने गुरु महाराज के लिए भिक्षा (भीख) मांगनी होती है। भिक्षा मांगने से हमारे अंदर का Ego और अहंकार खत्‍म हो जाता है और भिक्षा में जो भी आपको मिलेगा वह सब आपको अपने गुरु महाराज को दे देना होता है ।

इसके बाद ही आपका तीसरा स्‍टेप – हरिनाम दीक्षा पूर्ण होता है और गुरु महाराज आपको आधिकारिक रूप से अपने शिष्‍य के रूप में स्‍वीकार करते हैं ।

”श्रील प्रभुपाद जी ने एक पत्र में कहा था कि यदि भ‍क्‍त रोज 04 नियमों का पालन करता है और 16 माला का जाप करता है तो वह निश्चित रूप से भगवान के धाम जायेगा ।”

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हमारी टीम ने यह सब जानकारी जुटाने के लिए अपना सर्वोत्‍तम प्रयास किया है, तब कहीं जाकर हम आप तक ये सब जानकारी पहुंचा पा रहे हैं । इस्‍कॉन से दीक्षा लेने को लेकर आपके मन में जो डर और दबाव था, हमें पूरा विश्‍वास है कि इतनी जानकारी पढ़ने के बाद आपका मन जरूर हल्‍का हो गया होगा और आप अच्‍छा अनुभव कर रहे होंगे तथा आपके मन में यह विश्‍वास जागृत हो रहा होगा कि अब मैं भी इस्‍कॉन से दीक्षा ले सकता हूं ।

मुझे आशा है कि Iskcon se kaise jude लेख से पूरी जानकारी मिल गयी होगी यदि फिर भी आपके मन कोई सवाल या सुझाव है तो कमेंट के माध्‍यम से अवगत कराये और आपको यह लेख कैसा लगा कमेंट करके बताना ना भूले। लेख पढने के आपका धन्‍यवाद ।

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